लिपि परिचय
देवनागरी और लिप्यंतरण — मौखिक पाठ और लिपि पहचान के बीच सेतु।
जैन शास्त्रों को प्राकृत के मधुर रूप में — श्रवण, जप और अध्ययन — भक्त और विद्वान दोनों के लिए।
तीन मॉड्यूलर मार्ग साधकों को अभिलेखीय सामग्री के लिए तैयार करते हैं।
देवनागरी और लिप्यंतरण — मौखिक पाठ और लिपि पहचान के बीच सेतु।
कोमल संधि और भक्ति वाक्य — रटने से अधिक ध्यानपूर्वक पाठ।
स्तोत्र और सूत्रों की पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या।