प्रणम्य सागर
प्राकृत भाषा अध्ययन प्रतीक।
प्राकृत • Prakrut

श्रमण दृष्टि की भाषा निधि

जैन शास्त्रों को प्राकृत के मधुर रूप में — श्रवण, जप और अध्ययन — भक्त और विद्वान दोनों के लिए।

अध्ययन मार्ग

तीन मॉड्यूलर मार्ग साधकों को अभिलेखीय सामग्री के लिए तैयार करते हैं।

लिपि परिचय

देवनागरी और लिप्यंतरण — मौखिक पाठ और लिपि पहचान के बीच सेतु।

व्याकरण झलक

कोमल संधि और भक्ति वाक्य — रटने से अधिक ध्यानपूर्वक पाठ।

शास्त्र श्रवण

स्तोत्र और सूत्रों की पंक्ति-दर-पंक्ति व्याख्या।

विरासत संरक्षण

साहित्य देखें