प्रणम्य सागर
ध्यान मुद्रा में मुनि श्री प्रणम्य सागर जी।

आंतरिक
प्रबोधन का मार्ग

मुनि श्री प्रणम्य सागर जी के मार्गदर्शन में अर्हम् ध्यान योग, प्राकृत भाषा और आध्यात्मिक साहित्य की खोज करें — आधुनिक जीवन के लिए स्थिरता और शांति।

चिंतनमग्न मुनि श्री प्रणम्य सागर जी का चित्र।
२०+ वर्षों की आध्यात्मिक साधना

दृष्टा

मुनि श्री प्रणम्य सागर जी

प्राचीन ज्ञान के पुनरुद्धार में समर्पित विद्वान और आध्यात्मिक मार्गदर्शक। उनकी शिक्षाएँ शाश्वत जैन दर्शन को दैनिक जीवन से जोड़ती हैं।

अर्हम् ध्यान योग के अभ्यास से वे मानसिक स्थिरता और पूर्ण जीवन शक्ति की स्पष्ट राह खोलते हैं।

१००+
प्रकाशित ग्रंथ
५० हज़ार+
साधक समुदाय
संपूर्ण जीवनी और परंपरा

अर्हम् ध्यान योग

जैन परंपरा में संरक्षित ध्यान साधनाओं के माध्यम से मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक गहराई का समग्र मार्ग।

ध्यान तकनीकें

श्वास-सचेतना और अर्ह ध्यान में निहित दृश्यावलोकन — नवसाधक से अनुभवी तक, नियमित और स्थिर अभ्यास के लिए।

Sunrise meditation in a serene garden setting.

कमल पथ

पवित्रता, धैर्य और दृष्टि — कमल जिन गुणों का प्रतीक है, हमारे दैनिक अभ्यास में।

योग जानें

प्राचीन मूल

जैन शास्त्रों से निकले अभ्यास, समकालीन साधकों के लिए शुद्ध रूप में प्रस्तुत।

प्राकृत भाषा

परंपरा की भाषिक धड़कन — प्राकृत — मूल ग्रंथों और भक्ति अभिव्यक्ति का द्वार।

कक्षा में जुड़ें

नवीनतम प्रवचन

साधना पथ पर दृश्य झलकियाँ।

सभी वीडियो देखें

साहित्य

जैन धर्म, योग और जागृति पर संकलन — अपनी गति से पढ़ें।

पुस्तकालय देखें
Book cover suggesting Arh Dhyan Yoga with a minimal lotus graphic.

Arh Dhyan Yoga

A complete handbook for meditation rhythms and intentional living for modern seekers.

Read excerpt
Elegant book cover resembling an aged manuscript translation.

Prakrit Prabodh

A gentle doorway into the language underpinning Jain śāstra and śloka.

Read excerpt
Minimal cover with radiant sun symbolism.

Atma Chintan

Short contemplations inviting daily self-inquiry without heaviness.

Read excerpt
Hardcover book resting on timber with softened daylight.

Dharma Vijaya

Stories and commentary on steadfastness anchored in Jain moral insight.

Read excerpt

वैश्विक संघ से जुड़ें

यात्रा कार्यक्रम, प्रवचन, शिविर — जहाँ श्रवण का व्रत समुदाय बनता है।

आगामी विशाल शिविर

श्रवणबेलगोला, कर्नाटक • १५–२० जुलाई २०२४

स्थायी केंद्र

अर्ह ध्यान योग आश्रम, जयपुर, राजस्थान

भारत के प्रमुख केंद्रों का चित्रित मानचित्र।
राजस्थान में सक्रिय प्रवचन

समुदाय से जुड़ें